रचना चोरों की शामत

Sunday, 8 February 2015

कटौती


रेशमी ने बर्तन धोने के लिए अपनी आदत के अनुसार नल की टोटी खोली और धार की लय पर धड़ाधड़ बर्तन धोने लगी। देखते ही रमोला ने टोका-सुनो रेशमी! पानी की कटौती शुरू हो चुकी है, ज़रा रोक रोक कर पानी खर्च करो, इस तरह काम करोगी तो जल मिलना दूभर हो जाएगा। हमें तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, भरपूर पैसा देते हैं तो हमारे घरों में कटौती नहीं होती लेकिन इसका असर तुम लोगों की बस्तियों पर अवश्य पड़ेगा


रेशमी कई सालों से  रमोला के यहाँ काम करती आई है, हँसकर बोली दीदी, इसीलिए तो हम आप जैसों के घर फुर्ती से काम करके रूखी-सूखी रोटी जुटा लेते हैं, हमें तो वैसे भी प्रतिदिन  कटौती का सामना करना होता है। चार बाल्टी से अधिक पानी नहीं मिलता। लेकिन हाँ, अगर यहाँ नल रोककर आराम से काम करने लगें तो काम की कटौती से हमारी रूखी रोटी में भी कटौती हो जाएगी। रमोला निरुत्तर हो गई।   

-कल्पना रामानी 

No comments:

पुनः पधारिए

आप अपना अमूल्य समय देकर मेरे ब्लॉग पर आए यह मेरे लिए हर्षकारक है। मेरी रचना पसंद आने पर अगर आप दो शब्द टिप्पणी स्वरूप लिखेंगे तो अपने सद मित्रों को मन से जुड़ा हुआ महसूस करूँगी और आपकी उपस्थिति का आभास हमेशा मुझे ऊर्जावान बनाए रखेगा।

धन्यवाद सहित

-कल्पना रामानी

मेरी मित्र-मंडलियाँ

कथा-सम्मान

कथा-सम्मान
कहानी प्रधान पत्रिका कथाबिम्ब के इस अंक में प्रकाशित मेरी कहानी "कसाईखाना" को कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार से सम्मानित किया गया.चित्र पर क्लिक करके आप यह अंक पढ़ सकते हैं

कथाबिम्ब का जनवरी-मार्च अंक(पुरस्कार का विवरण)

कथाबिम्ब का जनवरी-मार्च अंक(पुरस्कार का विवरण)
इस अंक में पृष्ठ ५६ पर कमलेश्वर कथा सम्मान २०१६(मेरी कहानी कसाईखाना) का विवरण दिया हुआ है. चित्र पर क्लिक कीजिये